लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।
मूल पाठ
भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।
नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।
स्रोत अभिलेख 6.56 · पुस्तक पृ. 825, 826
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीका भजन करके तुम अपना कल्याण करो। हे नाथ! झूठी बकवाद छोड़ दो। नेत्रोंको आनन्द देनेवाले नीलकमलके समान सुन्दर श्याम शरीरको अपने हृदयमें रखो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 826 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।
English explanation
Serve and worship Rama, lord of Raghu’s line, for your own good. My lord, abandon false and futile talk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजि | भजन करके; भजो | by worshipping; worship |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s line |
| करु | करो | do |
| हित | भलाई | good; welfare |
| आपना | अपनी | your own |
| छाँड़हु | छोड़ दो | abandon |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| मृषा | झूठी; व्यर्थ | false; futile |
| जल्पना | बातें; बकवाद | talk; idle chatter |
2 नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।
English explanation
Keep Rama in your heart, whose beautiful dark body resembles a blue lotus and who delights the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नील | नीला | blue |
| कंज | कमल | lotus |
| तनु | शरीर | body |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| स्यामा | श्याम वर्ण वाला | dark-hued |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| राखु | रखो | keep |
| लोचनाभिरामा | नेत्रों को आनंद देने वाले राम को | Rama, who delights the eyes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 826
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 826
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।