लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।
मूल पाठ
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।
काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।
स्रोत अभिलेख 6.56 · पुस्तक पृ. 825, 826
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं-तू (भेद-भाव) और ममतारूपी मूढ़ताको त्याग दो। महामोह (अज्ञान)-रूपी रात्रिमें सो रहे हो, सो जाग उठो। जो कालरूपी सर्पका भी भक्षक है, कहीं स्वप्नमें भी वह रणमें जीता जा सकता है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 826 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।
English explanation
Give up the folly of ‘I,’ ‘you,’ and ‘mine’; awaken from sleeping in the night of profound delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | ‘मैं’ का भाव; अहंता | the sense of ‘I’ |
| तैं | ‘तू’ का भेदभाव | the distinction of ‘you’ |
| मोर | ‘मेरा’ का भाव; ममता | the sense of ‘mine’ |
| मूढ़ता | अज्ञानजनित मूर्खता | ignorant folly |
| त्यागू | त्यागो | give up |
| महा | घोर; महान | great; profound |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| निसि | रात्रि में | in the night |
| सूतत | सोते हुए; सो रहे | sleeping |
| जागू | जागो | awaken |
2 काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।
English explanation
Can the one who devours even the serpent of Death be defeated in battle, even in a dream?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल; मृत्यु | Death; destroying Time |
| ब्याल | सर्प | serpent |
| कर | का | of |
| भच्छक | भक्षण करने वाला | devourer |
| जोई | जो, अर्थात राम | the one who, namely Rama |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| समर | युद्ध में | in battle |
| कि | क्या | can; whether |
| जीतिअ | जीता जा सकता है | be defeated |
| सोई | उसी को | that very one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 826
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 825, 826
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