लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरणकी शोभाके लिये प्रभुने अपनेको नागपाशमें बँधा लिया; किन्तु उससे देवताओंको बड़ा भय हुआ॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 843 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
स्रोत अभिलेख 6.73 · पुस्तक पृ. 842, 843
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
English explanation
For the splendour of the battle, the Lord allowed himself to be bound; seeing him in serpent bonds, the gods became afraid.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रन | युद्ध की | of the battle |
| सोभा | शोभा; भव्यता | splendour |
| लगि | के लिए | for |
| प्रभुहिं | प्रभु ने ही; प्रभु स्वयं | the Lord himself |
| बँधायो | अपने को बँधने दिया | allowed himself to be bound |
| नागपास | सर्पों के पाश में | in serpent bonds |
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| भय | भय | fear |
| पायो | प्राप्त किया; अनुभव किया | experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 843
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 842, 843
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।