लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।
मूल पाठ
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।
सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।
स्रोत अभिलेख 6.57 · पुस्तक पृ. 826, 827
भावार्थ
मूल पाठ के बादहनुमान्जीने उससे जल माँगा, तो उसने कमण्डलु दे दिया। हनुमान्जीने कहा—थोड़े जलसे मैं तृप्त नहीं होनेका। तब वह बोला—तालाबमें स्नान करके तुरंत लौट आओ तो मैं तुम्हें दीक्षा दूँ, जिससे तुम ज्ञान प्राप्त करो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 827 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।
English explanation
Hanuman asked for water, and the false sage offered his water pot. Hanuman said, “So little water will not satisfy my thirst.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागा | माँगा | asked for |
| जल | पानी | water |
| तेहिं | उस कपटी मुनि ने | that false sage |
| दीन्ह | दिया | gave |
| कमंडल | साधु का जलपात्र | an ascetic’s water pot |
| कह | कहा | said |
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey |
| नहिं | नहीं | not |
| अघाउँ | मैं तृप्त होऊँगा | will I be satisfied |
| थोरें | थोड़े से | with so little |
| जल | पानी से | water |
2 सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।
English explanation
He said, “Bathe in the pond and return quickly. I shall give you initiation, through which you will attain knowledge.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर | तालाब में | in the pond |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| करि | करके | having done |
| आतुर | जल्दी | quickly |
| आवहु | लौट आओ | come back |
| दिच्छा | दीक्षा | spiritual initiation |
| देउँ | मैं दूँगा | I shall give |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| जेहिं | जिससे | through which |
| पावहु | तुम पाओगे | you will attain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 827
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 826, 827
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।