लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।
मूल पाठ
महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।
कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।
स्रोत अभिलेख 6.45 · पुस्तक पृ. 816, 816
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन बड़े-बड़े मुखियों (प्रधान सेनापतियों)-को पकड़ पाते हैं उनके पैर पकड़कर उन्हें प्रभुके पास फेंक देते हैं। विभीषणजी उनके नाम बतलाते हैं और श्रीरामजी उन्हें भी अपना धाम (परम पद) दे देते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 816 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Whatever great demon chieftains they find, they seize them by the feet and bring them to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महा | बहुत बड़े | very great |
| महा | बड़े-बड़े | great |
| मुखिआ | प्रमुख राक्षस | demon chieftains |
| जे | जिन्हें | whomever |
| पावहिं | पाते हैं | find |
| ते | उन्हें | them |
| पद | पैर | feet |
| गहि | पकड़कर | having seized |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पास | पास | near |
| चलावहिं | ले जाते हैं | bring |
2 कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।
English explanation
Vibhishana tells their names, and Rama grants even them his own abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहइ | बताते हैं | tells |
| बिभीषनु | रावण के भाई विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| तिन्ह | उनके | their |
| के | के | of |
| नामा | नाम | names |
| देहिं | देते हैं | grants |
| राम | प्रभु राम | Lord Rama |
| तिन्हहू | उन्हें भी | even to them |
| निज | अपना | his own |
| धामा | धाम | divine abode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 816
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 816
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।