लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।
मूल पाठ
खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।
उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।
स्रोत अभिलेख 6.45 · पुस्तक पृ. 816, 816
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मणोंका मांस खानेवाले वे नरभोजी दुष्ट राक्षस भी वह परम गति पाते हैं जिसकी योगी भी याचना किया करते हैं [परन्तु सहजमें नहीं पाते]। [शिवजी कहते हैं—] हे उमा ! श्रीरामजी बड़े ही कोमलहृदय और करुणाकी खान हैं। [वे सोचते हैं कि] राक्षस मुझे वैरभावसे ही सही, स्मरण तो करते ही हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 816 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।
English explanation
The wicked, who devour humans and eat Brahmins’ flesh, attain the spiritual destination that yogis seek.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्ट | wicked |
| मनुजाद | मनुष्य खाने वाले | human-devouring |
| द्विजामिष | ब्राह्मणों का मांस | Brahmins’ flesh |
| भोगी | भक्षण करने वाले | eaters of |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain |
| गति | मुक्ति की अवस्था | liberated state |
| जो | जिसे | which |
| जाचत | माँगते हैं | seek |
| जोगी | योगी | yogis |
2 उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।
English explanation
O Uma, Rama is tender-hearted and a fountain of compassion. Knowing that the demons remember him with hostility—‘they remember me’—he nevertheless grants them the supreme destination, as the next line completes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| राम | प्रभु राम | Lord Rama |
| मृदुचित | कोमल हृदय वाले | tender-hearted |
| करुनाकर | करुणा के भंडार | a fountain of compassion |
| बयर | शत्रुता का | hostile |
| भाव | भाव | disposition |
| सुमिरत | स्मरण करते हैं | remember |
| मोहि | मुझे | me |
| निसिचर | राक्षस | demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 816
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 816
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।