लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा हृदयमें जानकर वे उन्हें परमगति (मोक्ष) देते हैं। हे भवानी ! कहो तो ऐसे कृपालु [और] कौन हैं? प्रभुका ऐसा स्वभाव सुनकर भी जो मनुष्य भ्रम त्यागकर उनका भजन नहीं करते, वे अत्यन्त मन्दबुद्धि और परम भाग्यहीन हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 816 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।
अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।
स्रोत अभिलेख 6.45 · पुस्तक पृ. 816, 816
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।
English explanation
Though knowing this in his heart, Rama grants them the supreme destination. Tell me, O Bhavani, who else is so merciful?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहिं | देते हैं | grants |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| गति | मुक्ति की अवस्था | state of liberation |
| सो | वह बात | that fact |
| जियँ | हृदय में | in his heart |
| जानी | जानकर | knowing |
| अस | ऐसा | so |
| कृपाल | कृपालु | merciful |
| को | कौन | who |
| कहहु | बताओ | tell me |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
2 अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।
English explanation
Those dull-minded people who, even after hearing of such a Lord, do not abandon delusion and worship him are exceedingly unfortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसे | such |
| प्रभु | प्रभु के विषय में | of the Lord |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| न | नहीं | not |
| भजहिं | भजन करते हैं | worship |
| भ्रम | भ्रम | delusion |
| त्यागी | छोड़कर | having abandoned |
| नर | मनुष्य | people |
| मतिमंद | मंदबुद्धि | dull-minded |
| ते | वे | they |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| अभागी | अभागे | unfortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 816
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 816
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।