लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।
मूल पाठ
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।
मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।
स्रोत अभिलेख 6.19 · पुस्तक पृ. 789, 790
भावार्थ
मूल पाठ के बादभुजाएँ वृक्षोंके और सिर पर्वतोंके शिखरोंके समान हैं। रोमावली मानो बहुत-सी लताएँ हैं। मुँह, नाक, नेत्र और कान पर्वतकी कन्दराओं और खोहोंके बराबर हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 789 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।
English explanation
His arms resembled trees and his heads mountain peaks; his body hair seemed like numerous creepers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुजा | भुजाएँ | arms |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| सिर | सिर | heads |
| सृंग | पर्वत-शिखर | mountain peaks |
| समाना | समान | resembling |
| रोमावली | शरीर के रोमों की पंक्तियाँ | rows of body hair |
| लता | लताएँ | creepers |
| जनु | मानो | as though |
| नाना | अनेक | numerous |
2 मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।
English explanation
His mouths, noses, eyes, and ears appeared like caves and hollows in a mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुख | mouths |
| नासिका | नासिकाएँ | noses |
| नयन | नेत्र | eyes |
| अरु | और | and |
| काना | कान | ears |
| गिरि | पर्वत की | of a mountain |
| कंदरा | गुफाएँ | caves |
| खोह | खोहें | hollows |
| अनुमाना | प्रतीत होते थे | were perceived as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 789
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 789, 790
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।