लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह देखकर रीछ-वानरोंके झुंड ऐसे भागे जैसे भेडिय़ेको देखकर भेड़ोंके झुंड। [शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! वानर-भालू व्याकुल होकर आर्तवाणीसे पुकारते हुए भाग चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 838 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।
चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।
स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 838, 839
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।
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2 चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 838
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 839
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।