लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।
मूल पाठ
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।
तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 6.49 · पुस्तक पृ. 819, 820
भावार्थ
मूल पाठ के बादतू बूढ़ा हो गया, नहीं तो तुझे मार ही डालता। अब मेरी आँखोंको अपना मुँह न दिखला। रावणके ये वचन सुनकर उसने (माल्यवान्ने) अपने मनमें ऐसा अनुमान किया कि इसे कृपानिधान श्रीरामजी अब मारना ही चाहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 819 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।
English explanation
“You have grown old; otherwise I would have killed you. Do not show your face to me again.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूढ़ | बूढ़ा | old |
| भएसि | तू हो गया है | you have become |
| न | नहीं | not |
| त | तो | then; otherwise |
| मरतेउँ | मैं मार डालता | I would have killed |
| तोही | तुझे | you |
| अब | अब | now; henceforth |
| जनि | मत | do not |
| नयन | आँखें | eyes |
| देखावसि | तू दिखा | show |
| मोही | मुझे | to me |
2 तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।
English explanation
Malyavan concluded inwardly that Rama, the treasury of compassion, wished to slay this Ravana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसने, अर्थात् माल्यवान ने | he—Malyavan |
| अपने | अपने | his own |
| मन | मन में | in his mind |
| अस | ऐसा | thus |
| अनुमाना | अनुमान किया; समझा | concluded; understood |
| बध्यो | वध करना | to slay |
| चहत | चाहते हैं | wishes |
| एहि | इस रावण को | this Ravana |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार श्रीराम | Rama, the treasury of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 819
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 819, 820
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