लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।
मूल पाठ
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।
अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।
स्रोत अभिलेख 6.74 · पुस्तक पृ. 843, 844
भावार्थ
मूल पाठ के बादअरे मूर्ख! मैंने बूढ़ा जानकर तुझको छोड़ दिया था। अरे अधम! अब तू मुझीको ललकारने लगा है? ऐसा कहकर उसने चमकता हुआ त्रिशूल चलाया। जाम्बवान् उसी त्रिशूलको हाथसे पकड़कर दौड़ा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 843 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।
English explanation
Meghnada said, ‘Fool, I spared you because I considered you old; vile one, now you have begun challenging me!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूढ़ | बूढ़ा | old |
| जानि | जानकर; मानकर | considering; knowing |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| छाँड़ेउँ | मैंने छोड़ दिया; बख्श दिया | I spared |
| तोही | तुझे | you |
| लागेसि | तू लग गया | you have begun |
| अधम | हे नीच | O vile one |
| पचारै | ललकारने | to challenge |
| मोही | मुझे | me |
2 अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।
English explanation
Saying this, he swiftly hurled his trident. Jambavan caught that very trident in his hand and rushed forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| तरल | तेजी से; वेगपूर्वक | swiftly; with speed |
| त्रिसूल | त्रिशूल | trident |
| चलायो | चलाया; फेंका | hurled; launched |
| जामवंत | जामवंत, रीछों के प्रमुख | Jambavan, chief of the bears |
| कर | हाथ में | in his hand |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| सोइ | उसी त्रिशूल को | that very trident |
| धायो | दौड़े | rushed forward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 843
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 843, 844
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।