लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।
मूल पाठ
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।
कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 782, 783
भावार्थ
मूल पाठ के बादआकाशमें बिखरे हुए तारे मोतियोंके समान हैं, जो रात्रिरूपी सुन्दर स्त्रीके शृङ्गार हैं। प्रभुने कहा—भाइयो! चन्द्रमामें जो कालापन है वह क्या है? अपनी-अपनी बुद्धिके अनुसार कहो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 783 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।
English explanation
The stars scattered across the sky are pearls adorning the beautiful lady Night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिथुरे | बिखरे हुए | scattered |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| मुकुताहल | मोती | pearls |
| तारा | तारे | stars |
| निसि | रात | night |
| सुंदरी | सुंदर स्त्री | beautiful lady |
| केर | का | of |
| सिंगारा | श्रृंगार | adornment |
2 कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।
English explanation
Lord Rama says: Brothers, what is this darkness in the moon? Tell me according to your own understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| महुँ | में | in |
| मेचकताई | कालिमा | dark coloration |
| कहहु | बताओ | tell me |
| काह | क्या है | what is it |
| निज | अपनी | your own |
| निज | अपनी-अपनी | each one's own |
| मति | बुद्धि के अनुसार | according to understanding |
| भाई | हे भाइयो | O brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 783
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 783
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।