लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।
मूल पाठ
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।
मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 782, 783
भावार्थ
मूल पाठ के बादपूर्व दिशारूपी पर्वतकी गुफामें रहनेवाला, अत्यन्त प्रताप, तेज और बलकी राशि यह चन्द्रमारूपी सिंह अन्धकाररूपी मतवाले हाथीके मस्तकको विदीर्ण करके आकाशरूपी वनमें निर्भय विचर रहा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 782 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।
English explanation
AI draft: The moon dwells in a mountain cave in the east and is a treasury of supreme majesty, radiance, and strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरब | पूर्व | eastern |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| गिरिगुहा | पर्वत की गुफा | mountain cave |
| निवासी | रहने वाला | dweller |
| परम | अत्यंत महान | supreme |
| प्रताप | प्रताप | majesty |
| तेज | तेज | radiance |
| बल | शक्ति | strength |
| रासी | भंडार | treasury |
2 मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।
English explanation
The moon, a lion roaming the forest of the sky, rends the forehead of the maddened elephant of darkness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मत्त | मदमत्त | maddened |
| नाग | हाथी | elephant |
| तम | अंधकार | darkness |
| कुंभ | हाथी के मस्तक का उभार | elephant's forehead mound |
| बिदारी | चीरने वाला | one who rends |
| ससि | चंद्रमा | moon |
| केसरी | सिंह | lion |
| गगन | आकाश | sky |
| बन | वन | forest |
| चारी | विचरण करने वाला | one who roams |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 782
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 783
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।