लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकृपालु श्रीरामजी बार-बार ऐसा कहते हैं कि स्यारके मारनेसे सिं हको यश नहीं मिलता। अरे मूर्ख! प्रभुके [उन] वचनोंको मनमें समझकर (याद करके) ही मैंने तेरे कठोर वचन सहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 800 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।
मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 800, 801
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।
English explanation
Compassionate Rama repeatedly says that a lion gains no glory by killing a jackal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर | after time; again |
| अस | ऐसा | thus |
| कहइ | कहते हैं | says |
| कृपाला | कृपालु श्रीराम | compassionate Rama |
| नहिं | नहीं | not |
| गजारि | सिंह को | to a lion |
| जसु | यश | glory |
| बधें | मारने से | by killing |
| सृकाला | सियार को | a jackal |
2 मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।
English explanation
Fool, keeping my lord’s words in mind, I have endured your harsh words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | mind |
| महुँ | में | in |
| समुझि | समझकर; ध्यान में रखकर | understanding; keeping in mind |
| बचन | वचन | words |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | my lord Rama |
| केरे | के | of |
| सहेउँ | मैंने सहा है | I have endured |
| कठोर | कठोर; कटु | harsh |
| बचन | वचन | words |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| तेरे | तेरे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 800
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 800, 801
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।