लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।
मूल पाठ
अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।
दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 800, 801
भावार्थ
मूल पाठ के बादअरे दुष्ट! अब बतबढ़ाव मत कर; मेरा वचन सुन और अभिमान त्याग दे! हे दशमुख! मैं दूतकी तरह [सन्धि करने] नहीं आया हूँ। श्रीरघुवीरने ऐसा विचारकर मुझे भेजा है—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 800 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।
English explanation
Wretch, stop prolonging this argument now. Listen to my words and give up your pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जनि | मत | do not |
| बतबढ़ाव | बात बढ़ाना; व्यर्थ बहस | prolonging the argument |
| खल | हे दुष्ट | O wretch |
| करही | कर | do |
| सुनु | सुन | listen |
| मम | मेरे | my |
| बचन | वचन; बात | words |
| मान | अभिमान | pride |
| परिहरही | छोड़ दे | give up |
2 दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।
English explanation
Ten-headed Ravana, I would not have come as an envoy; Rama sent me after considering this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसमुख | हे दस सिरों वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| मैं | मैं | I |
| न | नहीं | not |
| बसीठीं | दूत के रूप में; दूताई करने | as an envoy; on an embassy |
| आयउँ | आया | came |
| अस | ऐसा | thus; this |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर श्रीराम ने | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| पठायउँ | मुझे भेजा | sent me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 800
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 800, 801
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।