लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।
मूल पाठ
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।
प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
स्रोत अभिलेख 6.13 · पुस्तक पृ. 784, 784
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे देवताओंके सम्राट्! सुनिये, अनुपम ताल और मृदंग बज रहे हैं। वही मधुर [गर्जन] ध्वनि है। रावणका अभिमान समझकर प्रभु मुसकराये। उन्होंने धनुष चढ़ाकर उसपर बाणका सन्धान किया;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 784 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।
English explanation
Fine cymbals and drums are playing; O sovereign of the gods, it is their sweet sound that you hear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाजहिं | बज रहे हैं | are being played |
| ताल | ताल देने वाले झाँझ-मंजीरे | rhythmic cymbals |
| मृदंग | मृदंग वाद्य | double-headed drums |
| अनूपा | अनुपम, सुंदर | incomparable, fine |
| सोइ | उन्हीं की | that very |
| रव | ध्वनि | sound |
| मधुर | मधुर | sweet |
| सुनहु | आप सुन रहे हैं | you hear |
| सुरभूपा | हे देवों के स्वामी राम | O Rama, sovereign of the gods |
2 प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
English explanation
Understanding Ravana’s arrogance, the Lord smiled, readied his bow, and set an arrow to shoot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मुसुकान | मुस्कुराए | smiled |
| समुझि | समझकर | having understood |
| अभिमाना | रावण का अभिमान | Ravana’s arrogance |
| चाप | धनुष | bow |
| चढ़ाइ | चढ़ाकर, तैयार करके | having readied |
| बान | बाण | arrow |
| संधाना | संधान किया | set and aimed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 784
- सहायक विषय
- श्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
- मुद्रित पृष्ठ
- 784, 784
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