लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबहुत प्रकारके गहने पहनाये और फिर वे एक सुन्दर पालकी सजाकर ले आये। सीताजी प्रसन्न होकर सुखके धाम प्रियतम श्रीरामजीका स्मरण करके उसपर हर्षके साथ चढ़ीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 886 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।
ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।
स्रोत अभिलेख 6.108 · पुस्तक पृ. 885, 886
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।
English explanation
They adorned Sita with many kinds of ornaments, then prepared and brought a beautiful palanquin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार के | kinds of |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| पहिराए | पहनाए | put on her; adorned her with |
| सिबिका | पालकी | palanquin |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| साजि | सजाकर; तैयार करके | having decorated and prepared |
| पुनि | फिर | then |
| ल्याए | ले आए | brought |
2 ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।
English explanation
Remembering loving Rama, the abode of happiness, Sita joyfully mounted that palanquin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उस पालकी | that palanquin |
| पर | पर | upon |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चढ़ी | चढ़ीं | mounted |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| राम | राम को | Rama |
| सुखधाम | सुख के धाम | abode of happiness |
| सनेही | स्नेह करने वाले | loving; affectionate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 886
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 885, 886
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