लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।
मूल पाठ
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।
काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।
स्रोत अभिलेख 6.17 · पुस्तक पृ. 787, 788
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमको बहुत समझाकर क्या कहूँ! मैं जानता हूँ, तुम परम चतुर हो। शत्रुसे वही बातचीत करना जिससे हमारा काम हो और उसका कल्याण हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 788 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।
English explanation
What need is there for me to explain much to you? I know you to be exceedingly discerning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुत | बहुत | at length |
| बुझाइ | समझाकर | by explaining |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| का | क्या | what |
| कहऊँ | मैं कहूँ | should I say |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| चतुर | चतुर | discerning |
| मैं | मैं | I |
| जानत | जानता | know |
| अहऊँ | हूँ | am |
2 काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।
English explanation
Speak to the enemy in a way that accomplishes our purpose and also serves his welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काजु | काम | purpose |
| हमार | हमारा | our |
| तासु | उसका, रावण का | his, Ravana’s |
| हित | भला | welfare |
| होई | हो | may be achieved |
| रिपु | शत्रु रावण | the enemy, Ravana |
| सन | से | with |
| करेहु | करना | conduct |
| बतकही | बातचीत | conversation |
| सोई | वही, उसी प्रकार की | that very kind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 788
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 787, 788
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।