लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह अच्छी सलाह सबके मनमें जँच गयी। कृपाके निधान श्रीरामजीने अंगदसे कहा—हे बल, बुद्धि और गुणोंके धाम बालिपुत्र! हे तात! तुम मेरे कामके लिये लङ्का जाओ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 788 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।
बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
स्रोत अभिलेख 6.17 · पुस्तक पृ. 787, 788
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।
English explanation
Everyone accepted this sound counsel. Rama, the treasury of compassion, spoke to Angada.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीक | अच्छी | sound |
| मंत्र | सलाह | counsel |
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| मन | मन को | to the minds |
| माना | स्वीकार हुई | was acceptable |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| सन | से | to |
| कह | कहा | said |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार श्रीराम | Rama, treasury of compassion |
2 बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
English explanation
O son of Bali, abode of wisdom, strength, and virtues! Dear son, go to Lanka on my business.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालितनय | हे बालि के पुत्र अंगद | O Angada, son of Bali |
| बुधि | बुद्धि | wisdom |
| बल | बल | strength |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| धामा | धाम, भंडार | abode |
| लंका | लंका को | to Lanka |
| जाहु | जाओ | go |
| तात | प्रिय पुत्र | dear son |
| मम | मेरे | my |
| कामा | काम के लिए | on business |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 788
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 787, 788
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।