लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।
मूल पाठ
बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।
नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।
स्रोत अभिलेख 6.65 · पुस्तक पृ. 834, 835
भावार्थ
मूल पाठ के बादभाईके वचन सुनकर विभीषण लौट गये और वहाँ आये जहाँ त्रिलोकीके भूषण श्रीरामजी थे। [विभीषणने कहा—] हे नाथ! पर्वतके समान [विशाल] देहवाला रणधीर कुम्भकर्ण आ रहा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 834 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।
English explanation
AI draft: Hearing his brother’s words, Vibhishana departed and came to Rama, the ornament of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंधु | भाई के | his brother’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| चला | चले | departed |
| बिभीषन | रावण के भाई विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| आयउ | आए | came |
| जहँ | जहाँ | where |
| त्रैलोक | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| बिभूषन | भूषण, यहाँ श्रीराम | the ornament, here Rama |
2 नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।
English explanation
Lord, Kumbhakarna, mountain-bodied and steadfast in battle, is coming.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे नाथ! | O Lord! |
| भूधराकार | पर्वत के आकार का | mountain-shaped |
| सरीरा | शरीर वाला | having a body |
| कुंभकरन | रावण का भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| आवत | आ रहा है | is coming |
| रनधीरा | युद्ध में धीर वीर | steadfast warrior in battle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 834
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 834, 835
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।