लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।
मूल पाठ
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।
प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।
स्रोत अभिलेख 6.18 · पुस्तक पृ. 788, 789
भावार्थ
मूल पाठ के बादचरणोंकी वन्दना करके और भगवान्की प्रभुता हृदयमें धरकर अंगद सबको सिर नवाकर चले। प्रभुके प्रतापको हृदयमें धारण किये हुए रणबाँकुरे वीर बालिपुत्र स्वाभाविक ही निर्भय हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 788 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।
English explanation
AI draft: Bowing at the Lord’s feet and holding his sovereign power in his heart, Angada departed after bowing his head to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | वंदना करके | having bowed in reverence |
| चरन | प्रभु के चरण | the Lord’s feet |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| प्रभुताई | प्रभु का प्रभुत्व और सामर्थ्य | the Lord’s sovereignty and power |
| अंगद | बालि के पुत्र अंगद | Angada, son of Bali |
| चलेउ | चले | departed |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | नवाकर | having bowed |
2 प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।
English explanation
With the Lord’s might in his heart, Bali’s son was naturally fearless—a bold and formidable warrior in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | प्रताप और सामर्थ्य | majesty and might |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| असंका | शंकारहित, निर्भय | free from apprehension; fearless |
| रन | रण में | in battle |
| बाँकुरा | साहसी वीर | a bold warrior |
| बालिसुत | बालि का पुत्र अंगद | Angada, Bali’s son |
| बंका | तेजस्वी और दुर्जेय | formidable and spirited |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 788
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 788, 789
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।