लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।
मूल पाठ
प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।
भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर प्रभुने हनुमान्जीको समझाकर कहा—तुम ब्रह्मचारीका रूप धरकर अवधपुरीको जाओ। भरतको हमारी कुशल सुनाना और उनका समाचार लेकर चले आना॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 901 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।
English explanation
AI draft: Lord Rama instructed Hanuman, “Assume the form of a young celibate student and go to Ayodhya.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| हनुमंतहि | हनुमान को | to Hanuman |
| कहा | कहा | said |
| बुझाई | समझाकर | with instructions |
| धरि | धारण करके | assuming |
| बटु | युवा ब्रह्मचारी | young celibate student |
| रूप | रूप | form |
| अवधपुर | अयोध्या नगर | the city of Ayodhya |
| जाई | जाकर | going to |
2 भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।
English explanation
“Tell Bharata that we are well, and return with news from there.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को | to Bharata, Rama’s brother |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| हमारि | हमारी | our |
| सुनाएहु | सुनाना | tell |
| समाचार | समाचार | news |
| लै | लेकर | having obtained |
| तुम्ह | तुम | you |
| चलि | चलकर | setting out |
| आएहु | लौट आना | come back |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 901
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।