लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।
मूल पाठ
तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।
नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
भावार्थ
मूल पाठ के बादपवनपुत्र हनुमान्जी तुरंत ही चल दिये। तब प्रभु भरद्वाजजीके पास गये। मुनिने [इष्टबुद्धिसे] उनकी अनेकों प्रकारसे पूजा की और स्तुति की और फिर [लीलाकी दृष्टिसे] आशीर्वाद दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 901 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।
English explanation
Hanuman, the wind god’s son, departed at once. Then Lord Rama went to the sage Bharadvaja.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | immediately |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| गवनत | प्रस्थान करते | departing |
| भयउ | हुए | began |
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| भरद्वाज | भरद्वाज मुनि | the sage Bharadvaja |
| पहिं | के पास | to |
| गयऊ | गए | went |
2 नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।
English explanation
The sage worshipped Rama in various ways, praised him, and then gave his blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| पूजा | पूजा | worship |
| कीन्ही | की | performed |
| अस्तुती | स्तुति | praise |
| करि | करके | having offered |
| पुनि | फिर | then |
| आसिष | आशीर्वाद | a blessing |
| दीन्ही | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 901
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
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