लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।
मूल पाठ
प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।
दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।
स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 782, 782
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामजी वानरराज सुग्रीवकी गोदमें अपना सिर रखे हैं। उनकी बायीं ओर धनुष तथा दाहिनी ओर तरकस [रखा] है। वे अपने दोनों कर-कमलोंसे बाण सुधार रहे हैं। विभीषणजी कानोंसे लगकर सलाह कर रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 782 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।
English explanation
Lord Rama rested his head in the lap of Sugriva, king of the monkeys; his bow and quiver lay to his left and right.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कृत | रखा | placed; rested |
| सीस | सिर | head |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of the monkeys |
| उछंगा | गोद में | in the lap |
| बाम | बाईं | left |
| दहिन | दाईं | right |
| दिसि | ओर | side |
| चाप | धनुष | bow |
| निषंगा | तरकश | quiver |
2 दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।
English explanation
Rama was adjusting arrows with both his lotus-like hands; Vibhishana, king of Lanka, offered counsel close to his ear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुहुँ | दोनों | both |
| कर | हाथ | hands |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| सुधारत | सँवार रहे; ठीक कर रहे | adjusting; putting in order |
| बाना | बाणों को | arrows |
| कह | कह रहे हैं | says; is speaking |
| लंकेस | लंका के राजा विभीषण | Vibhishana, king of Lanka |
| मंत्र | परामर्श | counsel |
| लगि | पास जाकर | drawing close to |
| काना | कान | the ear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 782
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 782
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।