लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ लक्ष्मणजीने वृक्षोंके कोमल पत्ते और सुन्दर फूल अपने हाथोंसे सजाकर बिछा दिये। उसपर सुन्दर और कोमल मृगछाला बिछा दी। उसी आसनपर कृपालु श्रीरामजी विराजमान थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 782 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।
ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।
स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 782, 782
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।
English explanation
There Lakshmana arranged and spread lovely tender leaves and flowers from the trees with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| तरु | वृक्षों के | of the trees |
| किसलय | कोमल नए पत्ते | tender new leaves |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुहाए | सुंदर | lovely |
| लछिमन | राम के छोटे भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| रचि | सजाकर; व्यवस्थित करके | having arranged |
| निज | अपने | his own |
| हाथ | हाथों से | with his hands |
| डसाए | बिछाए | spread out |
2 ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।
English explanation
A beautiful, soft deerskin lay upon that bedding; compassionate Rama sat on that seat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उस बिछावन | that bedding |
| पर | के ऊपर | upon |
| रूचिर | सुंदर | beautiful |
| मृदुल | कोमल | soft |
| मृगछाला | हिरन की खाल | deerskin |
| तेहीं | उसी पर; उसी | on that very; that same |
| आसान | बैठने का आसन | seat |
| आसीन | बैठे हुए | seated |
| कृपाला | कृपालु राम | compassionate Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 782
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 782
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