लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।
मूल पाठ
प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।
बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 782, 783
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामजीने कहा—विष चन्द्रमाका बहुत प्यारा भाई है। इसीसे उसने विषको अपने हृदयमें स्थान दे रखा है। विषयुक्त अपने किरणसमूहको फैलाकर वह वियोगी नर-नारियोंको जलाता रहता है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 783 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।
English explanation
The Lord says: Poison is the moon's brother; holding it very dear, the moon has given it a home in its heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कह | कहते हैं | says |
| गरल | विष | poison |
| बंधु | भाई | brother |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| केरा | का | of |
| अति | अत्यंत | very |
| प्रिय | प्यारा | dear |
| निज | अपने | its own |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दीन्ह | दिया | gave |
| बसेरा | निवास-स्थान | a dwelling |
2 बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।
English explanation
Spreading its poison-laden rays, the moon burns men and women suffering separation from their beloveds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिष | विष | poison |
| संजुत | से युक्त | laden with |
| कर | किरणों का | of rays |
| निकर | समूह | multitude |
| पसारी | फैलाकर | spreading |
| जारत | जलाता है | burns |
| बिरहवंत | विरह से पीड़ित | suffering separation |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 783
- सहायक विषय
- सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 782, 783
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।