लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।
मूल पाठ
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।
सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।
स्रोत अभिलेख 6.119 · पुस्तक पृ. 899, 900
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत्यन्त सुख देनेवाली तीन प्रकारकी (शीतल, मन्द, सुगन्धित) वायु चलने लगी। समुद्र, तालाब और नदियोंका जल निर्मल हो गया। चारों ओर सुन्दर शकुन होने लगे। सबके मन प्रसन्न हैं, आकाश और दिशाएँ निर्मल हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 900 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।
English explanation
An exceedingly pleasant breeze, endowed with three qualities, blew; the waters of the sea, lakes, and rivers were clear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुखद | सुख देने वाली | pleasant |
| चलि | चली | blew |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| बयारी | हवा | breeze |
| सागर | समुद्र | sea |
| सर | सरोवर | lakes |
| सरि | नदियाँ | rivers |
| निर्मल | स्वच्छ | clear |
| बारी | जल | water |
2 सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।
English explanation
Beautiful auspicious omens appeared on every side; hearts were joyful, and the sky and all directions were clear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुन | शुभ शकुन | auspicious omens |
| होहिं | होते हैं | occur |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| चहुँ | चारों | all four |
| पासा | ओर | sides |
| मन | मन | hearts |
| प्रसन्न | प्रसन्न | joyful |
| निर्मल | निर्मल | clear |
| नभ | आकाश | sky |
| आसा | दिशाएँ | directions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 900
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 899, 900
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।