लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।
मूल पाठ
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।
भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।
स्रोत अभिलेख 6.15 · पुस्तक पृ. 785, 786
भावार्थ
मूल पाठ के बादपाताल [जिन विश्वरूप भगवान्का] चरण है, ब्रह्मलोक सिर है, अन्य (बीचके सब) लोकोंका विश्राम (स्थिति) जिनके अन्य भिन्न-भिन्न अङ्गोंपर है। भयङ्कर काल जिनका भृकुटिसंचालन (भौंहोंका चलना) है। सूर्य नेत्र है, बादलोंका समूह बाल है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 785 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।
English explanation
AI draft interpretation: His feet are the netherworld and his head is Brahma’s realm; the other worlds rest in his various limbs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पद | चरण | feet |
| पाताल | पाताल लोक | the netherworld |
| सीस | सिर | head |
| अज | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| धामा | धाम; यहाँ ब्रह्मलोक | abode; here, Brahma’s realm |
| अपर | अन्य | other |
| लोक | लोक | worlds |
| अँग | अंग | limb |
| अँग | अंग; पुनरुक्ति से प्रत्येक अंग | limb; repetition means every limb |
| बिश्रामा | विश्राम करते हैं; स्थित हैं | rest; are situated |
2 भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।
English explanation
The movement of his brows is terrible Time; the sun is his eye, and masses of clouds are his hair.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृकुटि | भौंहें | brows |
| बिलास | चेष्टा; गति | movement; play |
| भयंकर | भयावह | terrible |
| काला | काल; विनाशकारी समय | Time, the destroyer |
| नयन | नेत्र | eyes |
| दिवाकर | सूर्य | the sun |
| कच | केश | hair |
| घन | मेघ | clouds |
| माला | मालाएँ; पंक्तियाँ | garlands; clusters |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 785
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 786
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।