लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।
मूल पाठ
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।
श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।
स्रोत अभिलेख 6.15 · पुस्तक पृ. 785, 786
भावार्थ
मूल पाठ के बादअश्विनीकुमार जिनकी नासिका हैं, रात और दिन जिनके अपार निमेष (पलक मारना और खोलना) हैं। दसों दिशाएँ कान हैं, वेद ऐसा कहते हैं। वायु श्वास है और वेद जिनकी अपनी वाणी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 786 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।
English explanation
The twin Ashvins are his nose, and nights and days are his countless blinks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनकी | whose |
| घ्रान | नासिका | nose |
| अस्विनीकुमारा | देव-वैद्य अश्विनीकुमारों की जोड़ी | the twin Ashvins, physicians of the gods |
| निसि | रात्रि | night |
| अरु | और | and |
| दिवस | दिन | day |
| निमेष | पलक झपकना | blinking of the eyes |
| अपारा | असंख्य; अपरिमित | countless; immeasurable |
2 श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।
English explanation
The Vedas describe the ten directions as his ears; wind is his breath, and the Vedas are his own speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रवन | कान | ears |
| दिसा | दिशाएँ | directions |
| दस | दस | ten |
| बेद | वेदों ने | the Vedas |
| बखानी | वर्णन किया है | have described |
| मारुत | वायु | wind |
| स्वास | श्वास | breath |
| निगम | वेद | the Vedas |
| निज | अपनी | his own |
| बानी | वाणी | speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 786
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 786
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।