लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।
मूल पाठ
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।
द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।
स्रोत अभिलेख 6.46 · पुस्तक पृ. 816, 817
भावार्थ
मूल पाठ के बादराक्षसोंकी सेना आती देखकर वानर लौट पड़े और वे योद्धा जहाँ-तहाँ कटकटाकर भिड़ गये। दोनों ही दल बड़े बलवान् हैं। योद्धा ललकार-ललकारकर लड़ते हैं, कोई हार नहीं मानते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 817 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।
English explanation
Seeing the demon army, the monkeys turned to face it; everywhere warriors clashed, gnashing their teeth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों की | of the demons |
| अनी | सेना | army |
| देखि | देखकर | seeing |
| कपि | वानर | monkeys |
| फिरे | पलटकर सामने हुए | turned to face them |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | वहाँ | there |
| कटकटाइ | दाँत किटकिटाकर | gnashing their teeth |
| भट | योद्धा | warriors |
| भिरे | भिड़ गए | clashed |
2 द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।
English explanation
The valiant warriors of both powerful armies fought, repeatedly challenging one another and refusing to concede defeat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वौ | दोनों | both |
| दल | दल | armies |
| प्रबल | बलवान | powerful |
| पचारि | ललकारकर | challenging |
| पचारी | बार-बार ललकारते हुए | challenging repeatedly |
| लरत | लड़ते थे | were fighting |
| सुभट | वीर योद्धा | valiant warriors |
| नहिं | नहीं | not |
| मानहिं | स्वीकार करते थे | would concede |
| हारी | हार | defeat |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 817
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 817
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।