लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरात हुई जानकर वानरोंकी चारों सेनाएँ (टुकडिय़ाँ) वहाँ आयीं जहाँ कोसलपति श्रीरामजी थे। श्रीरामजीने ज्यों ही सबको कृपा करके देखा त्यों ही ये वानर श्रमरहित हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 818 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।
स्रोत अभिलेख 6.48 · पुस्तक पृ. 818, 819
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
English explanation
Knowing that night had fallen, the monkeys of all four divisions came to where Rama, lord of Kosala, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसा | रात | night |
| जानि | जानकर | having recognized |
| कपि | वानर | the monkeys |
| चारिउ | चारों | all four |
| अनी | सैन्य-दल | army divisions |
| आए | आए | came |
| जहाँ | जहाँ | where |
| कोसला | कोसल राज्य के | of the kingdom of Kosala |
| धनी | स्वामी राम | the lord, Rama |
2 राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।
English explanation
Rama graciously looked upon them all, and at once the monkeys were freed from fatigue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| कृपा | दया | compassion |
| करि | करके | showing |
| चितवा | देखा | looked upon |
| सबही | सभी को | everyone |
| भए | हो गए | became |
| बिगतश्रम | थकान से मुक्त | free from fatigue |
| बानर | वानर | the monkeys |
| तबही | उसी क्षण | at that very moment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 818
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 818, 819
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