लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
मूल पाठ
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर अपनी व्याकुलताको समझकर [ऊपरसे] हँसता हुआ, भयको भुलाकर रावण महलको गया। [जब] मन्दोदरीने सुना कि प्रभु श्रीरामजी आ गये हैं और उन्होंने खेलमें ही समुद्रको बँधवा लिया है,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 777 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
English explanation
AI draft: Reflecting again on his own agitation, Ravana laughed and went home, dismissing his fear. Some readings here are uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | his own |
| बिकलता | व्याकुलता | agitation |
| बिचारि | विचार करके | having reflected on |
| बहोरी | फिर | again |
| बिहँसि | हँसकर | having laughed |
| गयउ | चला गया | went |
| ग्रह | घर | home |
| करि | करके | having made |
| भय | भय | fear |
| भोरी | भुलाकर या तुच्छ मानकर | forgotten or dismissed |
2 मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।
English explanation
Mandodari heard that Lord Rama had arrived and had a bridge built across the ocean as though it were mere play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरीं | रावण की पत्नी मंदोदरी ने | Mandodari, Ravana’s wife |
| सुन्यो | सुना | heard |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| आयो | आ गए | had arrived |
| कौतुकहीं | खेल-ही-खेल में | as mere play |
| पाथोधि | समुद्र | the ocean |
| बँधायो | सेतु बँधवा दिया | had a bridge built across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 777
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।