लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[तब] वह हाथ पकड़कर, पतिको अपने महलमें लाकर परम मनोहर वाणी बोली। चरणोंमें सिर नवाकर उसने अपना आँचल पसारा और कहा—हे प्रियतम! क्रोध त्यागकर मेरा वचन सुनिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 777 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
English explanation
Taking her husband by the hand, Mandodari brought him into her own residence and spoke in exceedingly gracious words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कर | हाथ | hand |
| गहि | पकड़कर | taking hold of |
| पतिहि | पति को | her husband |
| भवन | भवन में | into the residence |
| निज | अपने | her own |
| आनी | ले आकर | having brought |
| बोली | बोली | she spoke |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| मनोहर | मधुर और मनोहर | gracious and pleasing |
| बानी | वाणी | words |
2 चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।
English explanation
Bowing her head at his feet and spreading her garment’s hem in supplication, she said: Beloved, set aside your anger and hear my words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरणों में | at his feet |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिरु | सिर | her head |
| अंचलु | साड़ी का आँचल | the hem of her garment |
| रोपा | फैलाया | spread out |
| सुनहु | सुनिए | please listen to |
| बचन | बात | my words |
| पिय | हे प्रिय पति | beloved husband |
| परिहरि | त्यागकर | setting aside |
| कोपा | क्रोध | anger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 777
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।