लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।
मूल पाठ
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।
तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! वैर उसीके साथ करना चाहिये जिससे बुद्धि और बलके द्वारा जीत सके। आपमें और श्रीरघुनाथजीमें निश्चय ही कैसा अन्तर है, जैसा जुगनू और सूर्यमें!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 777 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।
English explanation
My lord, oppose only someone whom you can defeat through intelligence and strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| बयरु | बैर | enmity |
| कीजे | कीजिए | undertake |
| ताही | उसी | that person alone |
| सों | से | with |
| बुधि | बुद्धि से | through intelligence |
| बल | बल से | through strength |
| सकिअ | सका जाए | can be |
| जीति | जीता | defeated |
| जाही | जिसको | whom |
| सों | उससे मुकाबले में | in contest with |
2 तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।
English explanation
What is the difference between you and Rama, lord of Raghu’s line? Indeed, it is like that between a firefly and the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपमें | between you |
| रघुपतिहि | रघुवंश के स्वामी राम में | and Rama, lord of Raghu’s line |
| अंतर | अंतर | difference |
| कैसा | कैसा | of what kind |
| खलु | निश्चय ही | indeed |
| खद्योत | जुगनू | a firefly |
| दिनकरहि | सूर्य से | in relation to the sun |
| जैसा | जैसा | like that |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 777
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।