लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।
मूल पाठ
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।
जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने [विष्णुरूपसे] अत्यन्त बलवान् मधु और कैटभ [दैत्य] मारे और [वाराह और नृसिंहरूपसे] महान् शूरवीर दितिके पुत्रों (हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु) का संहार किया; जिन्होंने [वामनरूपसे] बलिको बाँधा और [परशुरामरूपसे] सहस्रबाहुको मारा, वे ही [भगवान्] पृथ्वीका भार हरण करनेके लिये [रामरूपमें] अवतीर्ण (प्रकट) हुए हैं!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 777 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।
English explanation
He who slew the immensely powerful Madhu and Kaitabha and destroyed the mighty descendants of Diti.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतिबल | अत्यंत बलवान | immensely powerful |
| मधु | मधु नामक असुर | the demon Madhu |
| कैटभ | कैटभ नामक असुर | the demon Kaitabha |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| मारे | मार डाले | slew |
| महाबीर | महान वीर | mighty warriors |
| दितिसुत | दिति के पुत्र, दैत्य | Diti’s offspring, the demons |
| संघारे | संहार किया | destroyed |
2 जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।
English explanation
He who bound Bali and slew the thousand-armed king has now incarnated to relieve the earth’s burden. The reading ‘सहजभुज’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| बलि | दैत्यराज बलि को | the demon king Bali |
| बाँधि | बाँधकर | having bound |
| सहजभुज | संभवतः सहस्रबाहु राजा को | probably the thousand-armed king |
| मारा | मारा | slew |
| सोइ | वही | that very one |
| अवतरेउ | अवतार लेकर आए | has incarnated |
| हरन | हरने के लिए | to remove |
| महि | पृथ्वी का | the earth’s |
| भारा | भार | burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 777
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।