लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
मूल पाठ
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 777, 778
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! उनका विरोध न कीजिये, जिनके हाथमें काल, कर्म और जीव सभी हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 778 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
English explanation
My lord, do not oppose him, in whose hands are time, karma, and living beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उनका | him |
| बिरोध | विरोध | opposition |
| न | मत | do not |
| कीजिअ | कीजिए | offer |
| नाथा | हे स्वामी | my lord |
| काल | काल | time |
| करम | कर्म | karma |
| जिव | जीव | living beings |
| जाकें | जिनके | whose |
| हाथा | हाथ में | in the hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 778
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 777, 778
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।