लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दस्त्रीके बाणके समान वचन सुनकर वह सबेरा होते ही उठकर सभामें चला गया और सारा भय भुलाकर अत्यन्त अभिमानमें फूलकर सिंहासनपर जा बैठा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 809 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।
बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।
स्रोत अभिलेख 6.38 · पुस्तक पृ. 809, 810
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।
English explanation
Hearing his wife's arrow-like words, Ravana rose at daybreak and went to the assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | पत्नी के | his wife's |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिसिख | बाण | arrows |
| समाना | के समान | like |
| सभाँ | सभा में | to the assembly |
| गयउ | गया | went |
| उठि | उठकर | having risen |
| होत | होते ही | as it became |
| बिहाना | सवेरा | morning |
2 बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।
English explanation
He went and sat proudly on the throne, forgetting all fear in his excessive arrogance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठ | बैठ गया | sat down |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सिंघासन | सिंहासन पर | on the throne |
| फूली | गर्व से फूलकर | swelling with pride |
| अति | अत्यधिक | excessive |
| अभिमान | अभिमान में | in arrogance |
| त्रास | भय | fear |
| सब | सारा | all |
| भूली | भूल गया | forgot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 809
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 809, 810
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।