लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।
मूल पाठ
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।
अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।
स्रोत अभिलेख 6.38 · पुस्तक पृ. 809, 810
भावार्थ
मूल पाठ के बादयहाँ (सुबेल पर्वतपर) श्रीरामजीने अंगदको बुलाया। उन्होंने आकर चरण-कमलोंमें सिर नवाया। बड़े आदरसे उन्हें पास बैठाकर खरके शत्रु कृपालु श्रीरामजी हँसकर बोले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 809 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।
English explanation
Meanwhile, Rama summoned Angada, who came and bowed his head at Rama's lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर | meanwhile, here |
| राम | राम ने | Rama |
| अंगदहि | अंगद को, बालि के पुत्र को | Angada, Bali's son |
| बोलावा | बुलाया | summoned |
| आइ | आकर | having come |
| चरन | चरण | feet |
| पंकज | कमल; कमल-समान | lotuses; lotus-like |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।
English explanation
Seating Angada nearby with great respect, compassionate Rama, the foe of Khara, smiled and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | great |
| आदर | आदर से | with respect |
| सपीप | पास | nearby |
| बैठारी | बैठाकर | having seated him |
| बोले | बोले | spoke |
| बिहँसि | मुस्कराकर | smiling |
| कृपाल | दयालु राम | compassionate Rama |
| खरारी | खर के शत्रु राम | Rama, Khara's foe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 809
- सहायक विषय
- अंगद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 809, 810
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