लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
मूल पाठ
नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।
स्रोत अभिलेख 6.102 · पुस्तक पृ. 878, 879
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसके नाभिकुण्डमें अमृतका निवास है। हे नाथ! रावण उसीके बलपर जीता है। विभीषणके वचन सुनते ही कृपालु श्रीरघुनाथजीने हर्षित होकर हाथमें विकराल बाण लिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 879 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
English explanation
Nectar of immortality resides in the hollow of his navel. Lord, Ravana lives by its power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाभिकुंड | नाभि के कुंड में | in the hollow of the navel |
| पियूष | अमृत | nectar of immortality |
| बस | बसता है | resides |
| याकें | इसके, रावण के | of this one, Ravana |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| जिअत | जीवित है | is alive |
| रावनु | रावण | Ravana, king of Lanka |
| बल | बल से | by the power |
| ताकें | उस अमृत के | of that nectar |
2 सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।
English explanation
Hearing Vibhishana’s words, compassionate Rama joyfully took fearsome arrows in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बिभीषन | विभीषण के | Vibhishana’s |
| बचन | वचन | words |
| कृपाला | कृपालु राम ने | compassionate Rama |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| गहे | लिए; पकड़ लिए | took; grasped |
| कर | हाथ में | in his hand |
| बान | बाण | arrows |
| कराला | भयानक | fearsome |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 879
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 878, 879
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