लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।
मूल पाठ
असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।
बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।
स्रोत अभिलेख 6.102 · पुस्तक पृ. 878, 879
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय नाना प्रकारके अशकुन होने लगे। बहुत-से गदहे, स्यार और कुत्ते रोने लगे। जगत्के दु:ख (अशुभ) को सूचित करनेके लिये पक्षी बोलने लगे। आकाशमें जहाँ-तहाँ केतु (पुच्छल तारे) प्रकट हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 879 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।
English explanation
Then various ill omens began to occur. Donkeys, jackals, and many dogs wailed and howled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असुभ | अपशकुन | ill omens |
| होन | होने | to occur |
| लागे | लगे | began |
| तब | तब | then |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| रोवहिं | रोते-चिल्लाते हैं | wail and howl |
| खर | गधे | donkeys |
| सृकाल | सियार | jackals |
| बहु | बहुत से | many |
| स्वाना | कुत्ते | dogs |
2 बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।
English explanation
Birds uttered cries portending distress for the world. Comets appeared here and there in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलहि | बोलते हैं | call out |
| खग | पक्षी | birds |
| जग | जगत के लिए | for the world |
| आरति | विपत्ति; पीड़ा | distress; calamity |
| हेतू | के सूचक | portending |
| प्रगट | प्रकट | visible |
| भए | हो गए | became |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; यहाँ-वहाँ | there; here and there |
| केतू | धूमकेतु | comets |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 879
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 878, 879
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।