लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशेषजी (लक्ष्मणजी) उसपर अनेक प्रकारसे प्रहार करने लगे। राक्षसके प्राणमात्र शेष रह गये। रावणपुत्र मेघनादने मनमें अनुमान किया कि अब तो प्राणसंकट आ बना, ये मेरे प्राण हर लेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 824 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।
रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।
स्रोत अभिलेख 6.54 · पुस्तक पृ. 824, 824
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।
English explanation
Lakshmana, identified with Shesha, strikes in various ways; the demon Megh nada is left barely alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| प्रहार | वार | blows |
| कर | करते हैं | deliver |
| सेषा | शेषस्वरूप लक्ष्मण | Lakshmana as Shesha |
| राच्छस | राक्षस मेघनाद | the demon Megh nada |
| भयउ | हो गया | became |
| प्रान | जीवन-प्राण | life |
| अवसेषा | मात्र शेष | barely remaining |
2 रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।
English explanation
Ravana’s son thought to himself: danger has come; he will take my life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | रावण का | Ravana’s |
| सुत | पुत्र मेघनाद | son, Megh nada |
| निज | अपने | his own |
| मन | मन में | in mind |
| अनुमाना | विचार किया | reasoned |
| संकठ | संकट | danger |
| भयउ | आ गया है | has arisen |
| हरिहि | हर लेगा | will take away |
| मम | मेरे | my |
| प्राना | प्राण | life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 824
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 824, 824
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।