लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक-दूसरेको (कोई किसीको) जीत नहीं सकता। राक्षस छल-बल (माया) और अनीति (अधर्म) करता है, तब भगवान् अनन्तजी (लक्ष्मणजी) क्रोधित हुए और उन्होंने तुरंत उसके रथको तोड़ डाला और सारथिको टुकड़े-टुकड़े कर दिये!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 824 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।
क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।
स्रोत अभिलेख 6.54 · पुस्तक पृ. 824, 824
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।
English explanation
Neither can defeat the other. The demon Megh nada resorts to unfair tactics through deceit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकहि | एक को, अर्थात दूसरे को | the one, meaning the other |
| एक | दूसरा योद्धा | the other warrior |
| सकइ | सकता है | can |
| नहिं | नहीं | not |
| जीती | जीतना | defeat |
| निसिचर | राक्षस मेघनाद | the demon Megh nada |
| छल | छल | deceit |
| बल | के बल से | by the power of |
| करइ | करता है | practices |
| अनीती | अनीति, अनुचित युद्ध-चालें | unfair tactics |
2 क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।
English explanation
Then Lakshmana, called Ananta, grew angry; he immediately shattered the chariot and struck down its charioteer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| क्रोधवंत | क्रोधित | angry |
| तब | तब | then |
| भयउ | हुए | became |
| अनंता | अनंत अर्थात शेषावतार लक्ष्मण | Ananta, identifying Lakshmana with Shesha |
| भंजेउ | तोड़ दिया; मार गिराया | shattered; struck down |
| रथ | रथ | chariot |
| सारथी | सारथी | charioteer |
| तुरंता | तुरंत | immediately |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 824
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 824, 824
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।