लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।
मूल पाठ
धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 772, 773
भावार्थ
मूल पाठ के बादविकट वानरोंके समूह (आप) दौड़ जाइये और वृक्षों तथा पर्वतोंके समूहोंको उखाड़ लाइये। यह सुनकर वानर और भालू हूह (हुंकार) करके और श्रीरघुनाथजीके प्रतापसमूहकी [अथवा प्रतापके पुंज श्रीरामजीकी] जय पुकारते हुए चले॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 773 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।
English explanation
Mighty bands of monkeys, hurry and bring masses of trees and mountains.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धावहु | दौड़ो | hurry |
| मर्कट | वानरों के | of monkeys |
| बिकट | विशाल; प्रबल | mighty; immense |
| बरूथा | हे दलों | O bands |
| आनहु | ले आओ | bring |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| गिरिन्ह | पर्वतों | mountains |
| के | के | of |
| जूथा | ढेर; समूह | masses; heaps |
2 सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
English explanation
Hearing this, the monkeys and bears set off with loud cries: ‘Victory to Rama, the embodiment of might!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | रीछ | bears |
| चले | चल पड़े | set off |
| करि | करते हुए | making |
| हूहा | हुंकार; कोलाहल | loud cries |
| जय | जय हो | victory to |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| प्रताप | प्रताप का | of might |
| समूहा | पुंज | embodiment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 773
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 772, 773
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