लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[देखा कि] वे रीछ-वानर दौड़ते हैं; औघट (ऊँची-नीची, विकट) घाटियोंको कुछ नहीं गिनते। पकड़कर पहाड़ोंको फोड़कर रास्ता बना लेते हैं। करोड़ों योद्धा कटकटाते और गर्जते हैं। दाँतोंसे ओंठ काटते और खूब डपटते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 812 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।
कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।
स्रोत अभिलेख 6.41 · पुस्तक पृ. 812, 812
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।
English explanation
They rush forward, heedless of difficult passes; seizing and breaking mountains, they make a path.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धावहिं | दौड़ते हैं | rush forward |
| गनहिं | परवाह करते हैं | pay heed to |
| न | नहीं | not |
| अवघट | दुर्गम | difficult to traverse |
| घाटा | घाट; पहाड़ी मार्ग | mountain passes |
| पर्बत | पर्वतों को | mountains |
| फोरि | फोड़कर | breaking apart |
| करहिं | बनाते हैं | make |
| गहि | पकड़कर | seizing |
| बाटा | रास्ता | a path |
2 कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।
English explanation
Millions of warriors gnash their teeth and roar; they bite their lips with their teeth and issue fierce threats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कटकटाहिं | दाँत किटकिटाते हैं | gnash their teeth |
| कोटिन्ह | करोड़ों | millions of |
| भट | योद्धा | warriors |
| गर्जहिं | गर्जते हैं | roar |
| दसन | दाँतों से | with their teeth |
| ओठ | होंठ | lips |
| काटहिं | काटते हैं | bite |
| अति | बहुत | fiercely |
| तर्जहिं | धमकाते हैं | threaten |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 812
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 812, 812
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।