लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवताओंके वचन सुनकर प्रभु मुसकराये। फिर श्रीरघुवीरने उठकर बाण सुधारे। मस्तकपर जटाओंके जूड़ेको कसकर बाँधे हुए हैं, उसके बीच-बीचमें पुष्प गूँथे हुए शोभित हो रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 858 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।
जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।
स्रोत अभिलेख 6.86 · पुस्तक पृ. 857, 858
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।
English explanation
Hearing the gods' words, the Lord smiled. Rama, the hero of Raghu's line, rose and readied his arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवताओं के | of the gods |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मुसकाना | मुसकराए | smiled |
| उठि | उठकर | having risen |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu's line |
| सुधारे | सँभाले, तैयार किए | readied |
| बाना | बाण | arrows |
2 जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।
English explanation
He bound his mass of matted hair firmly upon his head; flowers woven here and there within it looked beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जटा | जटाओं का | of matted hair |
| जूट | जूड़ा | coiled mass |
| दृढ़ | मजबूती से | firmly |
| बाँधै | बाँधा | bound |
| माथे | सिर पर | upon his head |
| सोहहिं | शोभा पाते हैं | look beautiful |
| सुमन | फूल | flowers |
| बीच | बीच | in between |
| बिच | बीच | at intervals |
| गाथे | गुँथे हुए | woven in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 858
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 857, 858
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।