लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।
मूल पाठ
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।
अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।
स्रोत अभिलेख 6.86 · पुस्तक पृ. 857, 858
भावार्थ
मूल पाठ के बादइधर देवताओंने स्तुति की कि हे श्रीरामजी! इसने हमको दारुण दु:ख दिये हैं। अब आप इसे [अधिक] न खेलाइये। जानकीजी बहुत ही दुखी हो रही हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 858 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।
English explanation
Meanwhile, the gods offered praise, saying, “This Ravana has brought terrible affliction upon us.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर | meanwhile, here |
| देवतन्ह | देवताओं ने | the gods |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| कीन्ही | की | offered |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| बिपति | विपत्ति | affliction |
| हमहि | हमें | to us |
| एहिं | इसने, रावण ने | this one, Ravana |
| दीन्ही | दी है | has brought |
2 अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।
English explanation
O Rama, do not toy with him any longer; Sita is suffering greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जनि | मत | do not |
| राम | हे राम | O Rama |
| खेलावहु | खेल की तरह उलझाए रखिए | keep toying with |
| एही | इसे, रावण को | him, Ravana |
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| दुखित | दुखी | distressed |
| होति | हो रही हैं | is becoming |
| बैदेही | विदेहकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 858
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 857, 858
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।