लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजाम्बवान्ने अपने दलका विध्वंस देखकर क्रोध करके रावणकी छातीमें लात मारी॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 873 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
स्रोत अभिलेख 6.98 · पुस्तक पृ. 872, 873
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 873
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 872, 873
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।