लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
मूल पाठ
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
स्रोत अभिलेख 6.96 · पुस्तक पृ. 869, 870
भावार्थ
मूल पाठ के बाददसों दिशाओंमें करोड़ों रावण दौड़ते हैं और घोर, कठोर भयानक गर्जन कर रहे हैं। सब देवता डर गये और ऐसा कहते हुए भाग चले कि हे भाई! अब जयकी आशा छोड़ दो!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 870 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
English explanation
Millions upon millions of Ravanas rush in all ten directions, roaring fiercely, harshly, and terrifyingly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दहँ | दसों | all ten |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| धावहिं | दौड़ते हैं | rush |
| कोटिन्ह | करोड़ों | tens of millions |
| रावन | रावण के रूप | forms of Ravana |
| गर्जहिं | गरजते हैं | roar |
| घोर | भीषण | fierce |
| कठोर | कठोर | harsh |
| भयावन | भय पैदा करने वाले | terrifying |
2 डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
English explanation
All the gods grew frightened and fled, saying, ‘Brothers, now abandon hope of victory.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| डरे | डर गए | became frightened |
| सकल | सभी | all |
| सुर | देवता | gods |
| चले | चल पड़े | set off |
| पराई | भागकर | in flight |
| जय | विजय | victory |
| कै | की | of |
| आस | आशा | hope |
| तजहु | छोड़ दो | abandon |
| अब | अब | now |
| भाई | हे भाइयो | O brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 870
- सहायक विषय
- रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
- मुद्रित पृष्ठ
- 869, 870
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