लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।
मूल पाठ
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।
अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।
स्रोत अभिलेख 6.37 · पुस्तक पृ. 808, 809
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पति! उन्हें आप बार-बार मनुष्य कहते हैं। आप व्यर्थ ही मान, ममता और मदका बोझा ढो रहे हैं! हा प्रियतम! आपने श्रीरामजीसे विरोध कर लिया और कालके विशेष वश होनेसे आपके मनमें अब भी ज्ञान नहीं उत्पन्न होता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 808 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।
English explanation
Beloved, you repeatedly call that very Rama a mere man and vainly drift in pride, possessiveness, and arrogance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उन राम को | that Rama |
| कहँ | को | as the object of ‘call’ |
| पिय | हे प्रिय पति | O beloved husband |
| पुनि | बार | again |
| पुनि | बार | and again |
| नर | मनुष्य | a human being |
| कहहू | तुम कहते हो | you call |
| मुधा | व्यर्थ ही | vainly |
| मान | अभिमान | pride |
| ममता | मोहपूर्ण अपनापन | possessive attachment |
| मद | अहंकार का नशा | intoxication of arrogance |
| बहहू | तुम बहते हो | you drift |
2 अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।
English explanation
Alas, husband! You have opposed Rama; under the sway of doom, understanding does not arise in your mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | हाय! | alas! |
| कंत | हे पति | O husband |
| कृत | किया है | have undertaken |
| राम | राम से | against Rama |
| बिरोधा | विरोध | opposition |
| काल | काल के | of doom |
| बिबस | वश में | under the sway |
| मन | मन में | in the mind |
| उपज | उत्पन्न होती | arises |
| न | नहीं | not |
| बोधा | समझ; विवेक | understanding; discernment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 808
- सहायक विषय
- रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 808, 809
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।