लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।
मूल पाठ
काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।
निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।
स्रोत अभिलेख 6.37 · पुस्तक पृ. 808, 809
भावार्थ
मूल पाठ के बादकाल दण्ड (लाठी) लेकर किसीको नहीं मारता। वह धर्म, बल, बुद्धि और विचारको हर लेता है। हे स्वामी! जिसका काल (मरण-समय) निकट आ जाता है, उसे आपहीकी तरह भ्रम हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 808 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।
English explanation
Time does not strike anyone by taking up a staff; it takes away righteousness, strength, intelligence, and discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | विनाशकारी काल | death-dealing Time |
| दंड | डंडा | a staff |
| गहि | पकड़कर | having taken hold of |
| काहु | किसी को | anyone |
| न | नहीं | not |
| मारा | मारता | strikes |
| हरइ | हर लेता है | takes away |
| धर्म | धर्म; सदाचरण | righteousness |
| बल | शक्ति | strength |
| बुद्धि | बुद्धि | intelligence |
| बिचारा | विवेक; विचारशक्ति | discernment; judgment |
2 निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।
English explanation
O lord, whoever approaches their doom falls into delusion just like yours.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निकट | पास | near |
| काल | मृत्यु का समय | the time of death |
| जेहि | जिसके | whose |
| आवत | आता है | comes |
| साईं | हे स्वामी | O lord |
| तेहि | उसे | to that person |
| भ्रम | भ्रम; मोह | delusion |
| होइ | होता है | occurs |
| तुम्हारिहि | तुम्हारे ही | your very own |
| नाईं | जैसा | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 808
- सहायक विषय
- रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 808, 809
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।